
छलावे भरे लोग है,यहाँ ,
बचकर सदैव रहना,सब,
नही तो फंसा देंगे, वे सब
ऐसे लोग भरे पड़े है,यहाँ ।
फूंक फूंक कर कदम रखना,
हरेक कदम रखने से,पहले,
खुद से निरीक्षण करना,
छलावे भरे लोगो से,सर्तक रहना।
छलावे लोग,अपना-पराया नही देखते,
ये सब,सिर्फ खुद का है,सोचते,
काम अपना कैसे बने,
बस,यही तरीका है अपनाते।
छलावे लोगो को,हम पहचाने कैसे?
ये बाते,एक सोचनीय बिन्दु है,
ऐसे लोग चिकनी,चुपड़ी करते है बाते
सारे काम पता हो,जैसे?
सब हो जायेगा,आसानी से होगा
मै हूँ न?,अवश्य होगा
विश्वास रखो,वादा है,सब ठीक होगा
मेरे रहते हुए, कुछ न बिगड़ेगा ।
ऐसी ही नाना प्रकार की करते है,बाते
जैसे उनसे बड़े कोई नही,आपके हितैषी
सारे काम,सारे लोग इसके ही इशारे
लोग है यहाँ चलते।
अंततः परिणाम क्या है, मिलता
इसे तो है,हमसबो को पता
नही हुआ, वक्त निकल गया,अच्छा रूको,
कहकर ये सब पल्ला अफना झाड है,लेता
अतः हमे सर्तक रहने की है,आवश्यकता
जैसे मुसीबत मे रहो तो,धेर्य रखो
सहायते के वास्ते,सहयोग लो
लेकिन जैसे ही छलावे महसूस हो,बरतो सर्तकता
चुन्नू साहा पाकूड़ झारखण्ड













