
मौन अधरों की भाषा बन,
मन का सारा हाल कहे।
बिन बोले जो भाव जगा दे,
वह मुस्कानों का कमल रहे।
कभी हँसी की धूप बिखेरे,
कभी नयनों का नीर बने।
कभी हृदय का स्नेह सजाए,
कभी आशा की लकीर बने।
रंग-बिरंगे इन प्रतीकों में,
भावों का संसार बसा।
दूरी कितनी भी हो चाहे,
इनसे हर संबंध हँसा।
पर इतना भी याद रहे,
सिर्फ़ प्रतीकों से बात न हो।
सच्चे शब्दों, सच्चे रिश्तों का,
जीवन में कभी अभाव न हो।
आओ मिलकर आज सभी,
प्रेम, विनय का मान करें।
इमोजी संग मधुर व्यवहार का,
हर पल सुंदर सम्मान करें।
विश्व इमोजी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
श्री ठाकुर, देवघर (झारखंड)













