
अभियान का नशा है हांँ ज्ञान का नशा है।
घर में चिराग हो ना जहान का नशा है।।
जुबान बड़ी मीठी दिल में है ज़हर पलता।
क्षुद्र स्वार्थ खातिर दल-दल में जाकर डलता।।
दीनों की रोटी छीने बोटी के पीछे दौड़े।
ऐसे जघन्यों को भी अन्नदान का नशा है।
अभियान का नशा है हांँ ज्ञान का नशा है।।
गंगा के तट पर जाकर झाडू हैं ये लगाते।
कुछ रोज ही है बीता अपशिष्ट डाल आते।।
महिला सशक्त होने की बात ये हैं करते।
निकल न जाए आगे इस बात से हैं डरते।
घर की महिला कैदी बखान का नशा है।।
अभियान का नशा है हांँ ज्ञान का नशा है।।
दुनिया की बेटियों को बचाओ और पढ़ाओ।
इश्तिहार ख़ूब करके छायाचित्र भी लगाओ।।
बनती है योजना सदा तोड़ने की खातिर।।
ईमान बेचकर है पाना मान का नशा है।।
अभियान का नशा है हांँ ज्ञान का नशा है।।
अभियान हो सफ़ल जब, सच्चाई पर चलोगे।
फहरेगा ध्वज गगन में कभी हाथ ना मलोगे।।
उद्देश्यपूर्ण तुमको अभियान लाना होगा।
ज्योति जला के तुमको नव बिहान पाना होगा।।
बिना रक्त को बहाए सम्मान का नशा है।
अभियान का नशा है हांँ ज्ञान का नशा है।।
साधना शाही, वाराणसी,उत्तर प्रदेश













