
मौसम की बेरुखी ने इतना तपाया की जागते रहे हम
रात में लाइट की आंख मिचोली कर गई सितम ।
देर तक नींद ना आई तो बेरुखे हो गए हम
काफी देर बाद लाइट आई तो थकी हुई पलकों को सीमेंट कर सो गए हम
पर आज सुबह जल्दी नहीं उठ पाए हम
धर्मेंद्र कुमार राठौर

मौसम की बेरुखी ने इतना तपाया की जागते रहे हम
रात में लाइट की आंख मिचोली कर गई सितम ।
देर तक नींद ना आई तो बेरुखे हो गए हम
काफी देर बाद लाइट आई तो थकी हुई पलकों को सीमेंट कर सो गए हम
पर आज सुबह जल्दी नहीं उठ पाए हम
धर्मेंद्र कुमार राठौर
డీజే స్వర ధ్వనుల డెందము భక్తికి నిదర్శనమౌనే
अंतर्राष्ट्रीय बिटिया दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
बेटियों की मुस्कान से महका कल्पकथा का साहित्यिक आँगन, 266वीं काव्यगोष्ठी में गूँजा बेटी के सम्मान का स्वर
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थोड़ा-थोड़ा आसमान
रंग जमाना पड़ता है
संस्कारों की अमिट विरासत
शहीद-ए -आजम सरदार भगत सिंह जी की 119वी जयंती
दुनिया बदल गई है …….