
परिदृश्य प्रकृति का अत्यंत मनोरम दिखता है,
बारिश का ये ये महीना,अब अच्छा लगता है,
चहुंओर हरियाली ही हरियाली दिखती है
मानो धरा,हरी परिधान धारण करती है।
भले बारिश के ये मौसम मे,धरा सारी
कीचड़ से जहा तहां रहती है,भरी भरी
फिर भी,उसे देखकर घृणा नही आती है
बल्कि मन मे एक प्रेम की गीत गुनगुनाती है ।
कल कल बहते पानी के शोर शराबे
खेती मे लहलहाते फसलो के ढेर सारे पौधे
मैदान, पहाड, सब तरफ मुरझाने पत्तो स रहति
वातावरण मे हरे पत्तो से लगी हुई है पौधे सहित।
चहुंओर नाले नदी खेत जल से लबालब है,भरी
रंग बिरंगे तितलिया, पक्षी, उडती है सारी
सालभर के खाने वास्ते अनाज जुटाने मे व्यस्त
कडी मेहनत करते है,लोग सारे होकर सात।
परिदृश्य ये प्रकृति का मन को भाता है
बारिश के बाद,इन्द्रधनुष आकाश मे दिखता है
एक अजीब सी हलचल मन मे जाग उठती है
हरेक मौसम की तरह,ये बारिश अच्छी लगती है ।
चुन्नू साहा पाकूड झारखण्ड













