
चलो आज चलते हैं प्रभु जी के द्वारे
अब वही हैं हम बच्चों की दुनिया के सहारे
धरती बनाई आपने, नदिया और मुहाने
सब कुछ मिल जाता है यहाँ मौसम भी सुहाने
माता पिता और परिवार संग खुशियाँ भी
संगी साथी और भाई बहन जिनसे है दुनिया भी
चलो आज……
शिक्षक और पुस्तक की दुनिया निराली
नहीं कोई शिकवा, राजा रानी की कहानी
जब पाठशाला जाएं, सीखते अच्छे आचार, विचार
दुनिया सिमट जाती है सिर्फ
हम से हैं पूरा संसार
चलो आज……
चंद्रयान भी पहुंचा है सब कुछ
जानने
नहीं कोई रहस्य बचेगा जो हमें नहीं मानने
पानी और ऑक्सीजन, कैसी है वहां की धरती ?
अगर मामा का घर है तो अपनी है मस्ती
चलो……
विज्ञान की बातें और खोजबीन का आधार
हम अब मानेंगे, जब वहाँ की दुनिया का मिलेगा सार
इसके बाद हमें रुकना नहीं है, बढ़ना है आगे ही आगे
सूर्य की धरती पर भी जाना होगा, स्वप्न यही जागे
चलो…..
सरोज बाला सोनी
कवयित्री













