
शब्दों के शिल्पी, गीतों के अमर साधक,
हिंदी साहित्य के उज्ज्वल आलोक थे आप।
प्रेम, करुणा, जीवन और मानवीय संवेदनाओं को
आपने अपनी लेखनी से अमर स्वर प्रदान किए।
आज आपकी पुण्यतिथि पर हम नमन करते हैं उस महान व्यक्तित्व को,
जिसकी रचनाएँ आज भी मन को छूती हैं और नई पीढ़ी को प्रेरित करती हैं।
आपका साहित्य समय की सीमाओं से परे,
सदैव हिंदी जगत का अमूल्य धरोहर बना रहेगा।
कोटि-कोटि विनम्र श्रद्धांजलि।
श्री ठाकुर, देवघर (झारखंड)













