
जिंदगी ने चाहा था यूं ही हमें न भूल जाना।
चाहे कहीं रहें ये जिंदगी है एक सफर सुहाना।
सफर है जिंदगी दुनिया में यादों का तराना।
कहे जिंदगी अपनी धरा पे लौट के आना।
चाहे मौसम कितना भी मन को लगे सुहाना।
मेरी मिट्टी की देन है जिंदगी और ये नजराना।
जिंदगी ने चाहा था यूं ही हमें न भूल जाना।
चाहे कहीं रहे ये जिंदगी है एक सफर सुहाना।
कर्मफल संतति संग मिले, है रब का नजराना।
मेरी धरा यूं ही न बने वक्त का अफसाना।
यहां रंग हजार,जमीं अपनी पे रुख्सत हो जाना
कर्मफल जिंदगी के अगर मिले सफर सुहाना।
जिंदगी ने चाहा था यूं ही हमें न भूल जाना।
चाहे कहीं रहे ये जिंदगी है एक सफर सुहाना।
ये कुदरत के नजारे चाहे ब्रिटिश कोलंबिया या
नियाग्रा रब का है धरा को खूब सूरत नजराना।
शिकागो न्यू यार्क देखा जिंदगी सफर सुहाना।
संतति संग जी लें ये जग है अनमोल खजाना।
जिंदगी ने चाहा था यूं ही हमें न भूल जाना।
चाहे कहीं रहें ये जिंदगी है एक सफर सुहाना।
महेश शर्मा, करनाल
(थरोल्ड-नियाग्रा)













