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जाने नेताओं का चरित्र

आओ बताते हैं हम नेताओं का हाल,
नेताओं की कहां होती है अच्छी चाल।

सुनो आगे कहते कुछ पीछे कहते कुछ,
कहां रही लाज वाली नेताओं की मुंछ,
प्यारे निराली इनकी होती जग में ढाल।

कैसा चरित्र है जान लों तुम यह बात,
बेढंगे है इनके काम मारो इनको लात,
यह नहीं चलते है इंसानियत के नाल।

होती गिरगिट कैसी बदलते वैसे रंग,
करतब इनके ऐसे सांप जैसे रहें संग,
सोच ऐसी है पराया भी अपना माल।

लोभ इतना जैसे गुड़ पर बैठे मख्की,
दिखाएं सपने ऐसे गेट होता लक्खी,
सत्ता जैसी मिलाते उसके संग ताल।

समझ लों नेता चुनने होंगे हमको ऐसे,
देश पर मिट गए आजाद सुभाष जैसे,
बिछ न सकें राजा जयचन्द जैसे जाल।

सुनील कुमार खुराना 
नकुड़ सहारनपुर उत्तर प्रदेश

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