
उमंग भरो ,
तरंग भरो
जीवन में नये नये रंग भरो।
रहै साथ गम भी,
कोई ग़म नहीं
मगर खुशियां भी हो साथ में हंसी खुशी संग भरो।
बेढंगे परिवेश में,
जीने का सही ढंग भरो।
कोई बात भी हों जाएं तो
हमको निभानें वाले संग करो।।
दूर से देखने वाले है यहां तमाशा ए जिन्दगी
इस तमाशे में
सभी सदस्यों को प्रसन्नता के रंग भरो ।।
अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)













