
”ॐ त्रिगुणम त्रिगुणाकारम,
त्रयनेत्रम त्रयजन्मपाप संहारक़म,
त्रय बेलपत्रम अहं शिवम् समर्पितौ,”
के शुभ मंत्र का जाप भी करते हैं।
जिस घर आँगन में बिल्व वृक्ष हो,
शिव प्रिया का वास वहीं है,
विष्णु प्रिया माता लक्ष्मी भी,
उस घर को सारा वैभव देती हैं।
बिल्वपत्र के औषधीय गुण,
अत्यंत अलौकिक होते हैं,
बिल्वपत्र रस व मधू मिश्रण से,
वात, पित्त, कफ दूर हो जाते हैं,
बेलफलों का शरबत पीकर,
अति शीतलता मिलती है,
इनका रस आँखों में जाकर,
आँखों की ज्योती बढ़ती है।
ख़ाली पेट पियें 11 पत्तों का रस,
सिर दर्द सदा ग़ायब हो जाये,
बेलपत्र की विस्तृत महिमा,
विधिवत आयुर्वेद बताये।
बेलपत्र, श्रीफल या सदाफल,
शिव जी को अति प्यारे,
भंग, धतूरा, मन्दार फल,
शिव बाबा को अर्पित करते।
सर्व मंगल मांगल्ये,
शिवे सर्वार्थ साधिके,
शरण्ये त्रयम्बके गौरी,
नारायणी नमोंsस्तुते।
मन्दार माला कुलितालकाये,
कृपाल मालाँकित शेख़राये,
दिव्यंबराये च दिव्यंबराये,
नम: शिवाय च नम: शिवाय।
श्रावण मास में सोमवार को,
रुद्राभिषेक सबको करना,
108 बेलपत्रों से शिव जी का,
विधिवत पूजन अर्चन करना।
शिव की महिमा शिव ही जाने,
हम सब तो उनके सेवक हैं,
शिव भक्त सदा ‘आदित्य’ रहें,
शिव ही सत्य हैं, शिव सुंदर हैं।
डा० कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ













