
राष्ट्र का भविष्य लिखते, आज के नन्हे विहान,
ज्ञान, श्रम, संस्कार से ही, पाएँ ऊँचा मान।
सत्य, सेवा, त्याग, तपस्या, हों जीवन का सार,
इनसे ही खिलता सदा, भारत का सत्कार।
शिक्षा हो चरित्रमयी, विज्ञानों का साथ,
नव-आविष्कारों से सजे, प्रगति का हर पथ।
श्रम का हो सम्मान सबको, मिटे भेद की रीत,
प्रेम, दया, सद्भाव
से ही, गूँजे भारत-गीत।
सीमा पर जो वीर खड़े, उनका रखें मान,
अन्न उगाता कृषक हमारा, है धरती की शान।
शिक्षक देता ज्ञान का दीप, करता पथ आलोक,
कर्मयोग से ही सजे, जीवन का प्रत्येक लोक।
आओ मिलकर आज करें, ऐसा दृढ़ संकल्प,
भ्रष्टाचार, हिंसा, घृणा का, होगा शीघ्र ही अंत।
हर बालक में स्वप्न जगे, हर बेटी मुस्काए,
ऐसा स्वर्णिम राष्ट्र हमारा, विश्वगुरु कहलाए।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार









