
स्वस्थ हूॅं तो स्वस्थ अरमान है ,
स्वस्थ हूॅं तो अपना जहान है ,
जीवन संगी है यह माता धरा ,
स्वस्थ हूॅं अपना आसमान है ।
स्वस्थ हूॅं तो आस भी मान है ,
स्वस्थ हूॅं तो आ भी समान है ,
अस्वस्थता में ये आसमा न है ,
अस्वस्थ आसमान असमान है ।
स्वस्थ जीवन सुख का आधार,
स्वस्थ जीवन तो सुखी बधार ,
स्वस्थ जीवन में है सब प्यारा ,
स्वास्थ्य ही जीवन का सार ।
तन में दिखता मुख जहाॅं है ,
वहीं से दिखता भूख जहाॅं है ,
जीवन का सुख दुःख यहीं से ,
स्वस्थ नहीं तो जीवन कहाॅं है।
स्वस्थ जीवन स्वस्थ अरमान ,
स्वास्थ्य ही जीवन का शान ,
स्वास्थ्य ही मंजिल संकल्प ,
मंजिल ही स्वास्थ्य पहचान ।
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।









