
जितने लोग उतनी बातें सच अलग है।
कहा लोग एक से नजरिया सब अलग है।।
दिखावें के दौर ने सब कुछ बदल दिया।
अपनों से अपना दिल से हम अलग है।।
कोई नही सुनता कोई किस की यहां।
चलते दिमाग सबके ख्याल अब अलग है।।
मन के स्वार्थी हैं जो दिखते दानवीर।
सच में उनके धर्म अलग कर्म अलग है।।
बुजुर्गों का आशीष तुम्हे बड़ा कर गया।
उनकी न मानो अब अजब गजब अलग है।।
हरेक शख्स रहता है अपनी मस्ती में।
उसका गीत स्वर बंदिश धुन सब अलग है।।
मनोहर चल कुछ हटकर नया कर जाए।
देखते ही सब कहें सबसे यह अलग है।।
गीतकार मनोहरसिंह चौहन मधुकर













