
बारिश सिर्फ़ मौसम नहीं…
बारिश सिर्फ़ मौसम नहीं है,
एहसासों का एक अनवरत सफ़र है।
हर बूँद अपने साथ
किसी भूली हुई याद का स्पर्श,
किसी अधूरे ख़्वाब की ख़ुशबू,
और किसी अनकहे प्रेम का संदेश लेकर आती है।
मुझे बारिश इसलिए पसंद है,
क्योंकि यह बिना कुछ कहे
मन की धूल धो देती है।
भीगे हुए रास्तों पर चलते-चलते
ऐसा लगता है जैसे ज़िंदगी
फिर से नई होकर मुस्कुरा उठी हो।
बारिश में भीगते पेड़,
मिट्टी की सौंधी महक,
खिड़की पर ठहरी बूँदें,
और चाय की उठती भाप—
ये सब मिलकर
रूह के लिए एक कविता लिख देते हैं।
बारिश सिखाती है कि
बरसना ही जीवन है,
बादल बनकर घिरना भी ज़रूरी है,
और कभी-कभी
ख़ुद को बूँदों की तरह बिखेर देना भी।
शायद इसलिए
मुझे बारिश बहुत पसंद है…
क्योंकि हर बरसात के साथ
दिल थोड़ा और साफ़ हो जाता है,
उम्मीदें थोड़ी और हरी हो जाती हैं,
और ज़िंदगी फिर से जीने का मन करने लगता है।
🌧️ “बारिश में भीगता सिर्फ़ तन नहीं, कभी-कभी रूह भी धुल जाती है।”
धर्मेंद्र कुमार राठौर
व्याख्याता भौतिक विज्ञान
झालावाड़ राजस्थान













