
प्रकृति सुरभित हो गई देख काम कमान
रति भी ललचा रही देने को मधु रसपान
उत्साह उमंग से भरे हुये निकल पडे मदन
नियति हर्षित हो बहा रही मकरंद पवन
पक्षी कलरव करें कुहुकी कोयल वन उपवन
धरती पर पीली चादर बिछी उभर गया यौवन।
गोवर्धन थपलियाल

प्रकृति सुरभित हो गई देख काम कमान
रति भी ललचा रही देने को मधु रसपान
उत्साह उमंग से भरे हुये निकल पडे मदन
नियति हर्षित हो बहा रही मकरंद पवन
पक्षी कलरव करें कुहुकी कोयल वन उपवन
धरती पर पीली चादर बिछी उभर गया यौवन।
गोवर्धन थपलियाल
भारत के लाड़ले, मिसाइल मैन अब्दुल कलाम
आज ही सुना जाए
26 जुलाई 2026 को साहित्यकार संगम संस्था बुलंदशहर द्वारा कारगिल विजय दिवस पर श्री नारायण समाचार पत्रालय खुर्जा में एक काव्य संध्या का आयोजन किया गया।
युवा और सैनिक
एक निर्णय…
कारगिल विजय दिवस
हमरी भी सुन लो ओ बरखारानी
मोहब्बत अभी ये नई नई है
याद करें उन वीरों को हम
कारगिल विजय दिवस