
ऐ दोस्त , तुझसे ही मेरा आशियाना आबाद है ,
मेरे दोस्त तेरी यादों के आने से
तेरे हि सपनें बसतें है निंद में अब ,
मैं तो मालामाल हुं, यादों के खजाने से।।
मुझे मेरे हाल पर छोड़ दें ऐ जिन्दगी,
मेरा यार सपने में आता है आजकल।
मैं अच्छा हुं या बुरा हुं यह बात छोड़ दें।
हम मिल हि लेते हैं किसी भी बहाने से।।
मैं उससे कहता हुं कि
बताओ दोस्त तुम कैसे हो?
गुजार दी जिंदगी रुठने मनाने में।
अकेले तन्हाई में तो नहीं रहते हो।
क्यों देर कर दी तुमने मुझे आवाज लगाने में।
कभी मुझे याद भी करते हों या नहीं।
या हंसी ठहाके में वक्त गुजार देते हों।
याद तो मुझे भी तेरी बहुत आती है ।
मेरे दोस्त
कभी तुम्हारी यादों में आंसू निकलते हैं, तो
खुद से ही प्यार भरी बातें करते हैं तो आंखों से आंसू बह निकलतें हैं।
कभी तेरे पास आने कि कोशिशें करता हुं।।
मगर इतना वक्त नहीं है उम्र के खजाने में।।
मोत से भी कह दिया है मैंने आ गले लगा कर सुला दे जहां सपने में मेरा दोस्त आ मिले,
वक्त कट जाएगा हमारा
हंसने हंसाने में
जिंदगी को भी कह दिया है मैंने कि मत पकड़
वक्त रहते
मुझे छोड़ दे मुझे मेरे दोस्त के पास जाना है
अब क्या रखा है और बहाने में
अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)













