
यदि कम पैसा है तो
थोड़ा कम पढ़ाओं
मगर अभिभावकों से
विनती है भारतीयता
औंर सभ्यता अवश्य
बच्चों को सिखाओं
माँ बाप पहले गुरू
होते हैं ऐ तो समझ पाओं
जो बनाओगें बच्चों को उदंड यूँ ही
फिर स्वतः ही मां बाप को
भी मिलेगा दण्ड कहीं न कहीं
क्योंकि विद्या विनय सिखाती है
उद्दंडता की नहीं कोई माफी है
यदि उदडंता भारतीयता पर हावी हुई
समाज नहीं करेगा माफ जो
भारतीयता की बर्बादी हुई
ऐ विवेकानन्द राधाकृष्णन्
को धरती है
यहाँ सदियों से सभ्यता पलती है
बच्चों को देखकर परिवार का पता चलता है
बच्चों के चेहरे से उसका संस्कार झलकता है
संस्कारित बच्चे कभी असफल
नहीं होते
दुआओं से ऐ फलित होते है
गुरु और परिवार से दुआऐं
पाते है
समाज में शीर्ष मुकाम तक
जाते है
शीलू जौहरी भरूच













