
मात-पिता हैं इस जगत में साक्षात भगवान,
मेरी नज़रों में मात-पिता हैं महान।
मात के चरणों में झुकता है सारा जहान,
मात-पिता के बिन अधूरे हैं भगवान।
सूरज के समान है पिता का ताप,
धूप में जलकर हमें देता है छाँव।
पिता के बिन अधूरे हम और आप,
पिता का नाम ही है बेटे का मान।
माँ में है चंदा-सी शीतलता का प्रताप,
आँचल में सारी दुनिया का आराम।
भूखी रहकर हमें खिलाती है माँ,
आँसू पीकर हमें हँसाती है माँ।
मात के चरणों में कोटि-कोटि वंदन,
पिता की मेहनत कोटि-कोटि नमन।
जिस घर में मात-पिता का है मान,
उस घर में बसते हैं चारों धाम।
आओ इस जगत के मात-पिता का करें अभिनंदन,
सेवा करके उनका बढ़ाएँ मान।
‘विद्रोही’ कहे सुनो ऐ इंसान,
मात-पिता की पूजा ही सबसे बड़ा तीर्थस्थान।
मात-पिता की सेवा से वो घर बन जाता मंदिर समान।
बोलो मात-पिता की जय
बोलो भारत माता की जय
गोपाल जाटव ‘विद्रोही’ खड़ावदा
तह. गरोठ, जिला मंदसौर, मध्यप्रदेश, भारत













