
गुरु ज्ञान का सागर है, जीवन राह दिखाता है।
गुरु प्रेम की धारा है, मन का मैल मिटाता है।
गुरु शब्द का मंत्र है, अंधकार दूर भगाता है।
गुरु कर्म की प्रेरणा है, हर कदम आगे बढ़ाता है।
गुरु पिता समान होता है, डांट कर राह सिखाता है।
गुरु मां समान होता है, भूलों को गले लगाता है।
गुरु मित्र समान होता है, संग में हौसला बढ़ाता है।
गुरु देव समान होता है, शीश झुका आशीष पाता है।
गुरु बिना विद्या अधूरी है, गुरु बिना ज्ञान अधूरा है।
गुरु बिना संस्कार अधूरे हैं, गुरु बिना जीवन अधूरा है।
गुरु ने अक्षर जोड़े हमको, गुरु ने सपने बुनना सिखाया।
गुरु ने गिर कर उठना सिखाया, गुरु ने खुद से लड़ना सिखाया।
आज गुरु पूर्णिमा आई है, वंदन करने का दिन आया है।
चरणों में शीश झुकाते हैं, ऋण चुकाने का दिन आया है।
शब्द कम पड़ जाएंगे सारे, भावना व्यक्त न हो पाएगी।
इसलिए बस इतना कहेंगे, गुरु कृपा से नैया पार होगी।
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरु साक्षात परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥
— गुरु कोटि कोटि प्रणाम
अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला ‘अमन’ सनातनी
सावनेर नागपुर ( महाराष्ट्र)













