
तुम ही गुरु हो तुम्ही प्रताप
मैं अज्ञानी मुझ मे ही छिपे सारे पाप
तुम आदि तुम्ही अनंत
तुमसे ही शुरु मेरी दुनियाँ तुम्ही से अंत
तुम ही गुरु हो तुम्ही प्रताप
है पाप पुण्य के पारखी है मार्ग विधाता
तुम्ही मेरे भाग्य तुम्ही हो जीवन दाता
करूँ नित तुम्हारा ही ध्यान
चरण पखारूँ भजे स्तुति गान
तुम ही गुरु हो तुम्ही प्रताप
पल पल ही बाबा तुम्हारा साथ है
है बाबा जीवन की तुम्ही से आस है
गलती से भी गलती ना हो
देना आशीष बाबा कि दूर सारे रहे पाप है
तुम ही गुरु हो तुम्ही प्रताप
सदमार्ग पर चलना तुमने ही सिखाया
परमार्थ का ही सदैव पाठ पढ़ाया
तुम्ही आस जीवन की बाबा तुम्ही दिलास हो
तुम हमारे प्रथम पूज्य तुम्ही साक्षात हो
नमन है बाबा भाऊजी महाराज नमन आपका साथ है
तुम ही गुरु हो तुम्ही प्रताप
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र











