
सावन मन भावन आयो रे,प्रेम-सुधा बरसायो रे,
सूखे मन के आँगन में,आशा का दीप जलायो रे।।
काली घटा ने बाँह पसारी,
धरती ने मुस्कान सँवारी,
हरियाली का आँचल ओढ़े
,प्रकृति ने श्रृंगार रचायो रे, ,,,,मन भावन सावन आयो रे
रिमझिम बूँदें जब बरसें,
मन के सारे घाव भी धुलें,
बीते कल के दर्द सभी,
मिट्टी की खुशबू में घुले ,,,,,सावन मन भावन आयो रे आयो रे
झूले झूलें अमराई डाली,
कोयल गाए मधुर कहानी।
प्रेम-भक्ति की पावन धारा,
हर हृदय में बहायो रे,,,,,सावन मन भावन आयो रे…
डॉ रुपाली गर्ग
मुंबई महाराष्ट्र













