
लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर आज जितने उदाहरण देखे जाएं कम ही है, इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है
- स्वतंत्रता * भारत में बोलने की, अपने पक्ष की बात रखने की जो स्वतंत्रता है वह मर्यादित होना ही भारत का सम्मान है ; परंतु आज समय बदल रहा है लोग अपना पक्ष रखते जरूर है बात करते जरूर है परंतु अपना पक्ष रखते समय अपनी बात कहते समय मर्यादाओं का उल्लंघन जैसे आज फैशन बन गया है!
वर्तमान में घटित घटना नीट छात्रों के लिए,जंतर मंतर पर हुए आंदोलन ,Zen G नाम से युवाओं ने अपना समूह बनाकर कई सारे भाषण मीडिया के जरिए प्रचार प्रसार किया गया । इसमें कई प्लेटफार्म फेसबुक, इंस्टाग्राम एवं एक्स ( Twitter) जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म सम्मिलित थे! जिन पर लगातार यह सारे वीडियो वायरल हो रही थी। जिसमें भद्दे नाच , गाली गलौज एवं भारतीय जनता के द्वारा चुने गए प्रधान मंत्री आदरणीय मोदी जी के लिए भी कई ऐसी बातें थी जो लिखना मेरी मर्यादा के खिलाफ है। इस प्रकार खुलेआम अपनी भाषा की स्वतंत्रता का फायदा उठाकर अमर्यादित, टिप्पणियों के साथ ही उनको लगा होगा कि उनका यह कार्य उन्हें रातों-रात लोकप्रिय बना देगा, उनके व्यू एवं फॉलोअर्स बढ़ जाएंगे हां बिल्कुल ऐसा ही हुआ उनके व्यू एवं फॉलोअर्स तो बड़े परंतु उनकी लोकप्रियता नहीं बड़ी उल्टा आज इस प्रकार की सोशल अकाउंट को बंद करने की नौबत आ गई क्योंकि क्रिया की प्रतिक्रिया होती है ! यदि आप गलत बोलेंगे तो आपको भी नहीं छोड़ा जाएगा।
भारत में रहकर भारत में ही देश विरोधी जैसी बातें करके मर्यादाओं को तोड़ने वाले कभी देशभक्त हो नहीं सकते अपनी बात रखना बिल्कुल उचित है और रखनी भी चाहिए परंतु इसके साथ यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि जिस भारत में आपको पहचान मिलती है आपको सम्मान मिलता है आपका अस्तित्व की पहचान बनती है, ऐसे Zen G वर्ग ने आज भले ही अपनी मांग मनवाली वाली हो, लेकिन इसमें सरकार का भी साधुवाद है, यदि सरकार ना सुनाना चाहती तो नहीं सुनती, आप सरकार को गलत नहीं कह सकते क्योंकि भारत की सरकार सुनने और समझने दोनों में विश्वास करती है ।
आज देश बदल रहा है मायने बदल रहे हैं, हम किसी भी सत्ता पक्ष की किसी दूसरी सत्ता पक्ष से तुलना करना व्यर्थ ही है आज जितना लोकतंत्र मजबूत होगा उतना ही हम भी आगे बढ़ेंगे परंतु यह बात आज की युवाओं को समझनी होगी कि भारत आज आक्रांताओं से कई बार चोट खाने के बाद सरवाइव कर रहा है, हमें समझना होगा कि बाहरी शक्तियों भारत में गृह युद्ध करवाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है, ऐसे माहौल में हमारे देश के मुद्दों को लेकर सोशल मीडिया पर इस प्रकार मजाक बनाना अपने ही देश की बदनामी करने के बराबर है। यहां हमारे संस्कारों को द्वारा यह दिखाया जाता है की भारत में आज भी कोई तरक्की नहीं हुई है।
हमने सिर्फ पाश्चात्य संस्कृति को अपनाना ही सीखा है! स्वयं भारत की आत्मा आज चोटिल होती नजर आती है जब यहां का युवा क्रोध में आकर कहता है कि भारत को हम युद्ध की कगार पर लाकर खड़ा कर देंगे, नेपाल जैसा बना देंगे सोचिए आज जो आप भोजन कर रहे हैं वह भी आपको आपका देश के मेहनती किसान ही दे रहा है। कैसे-कैसे लोग है जो भारतीय सेना के लिए अभद्र टिप्पणियां करते हैं! आज का युवाओ से यह अपेक्षा बिल्कुल नहीं थी , आज यदि आप वर्तमान में अपने घर में सुरक्षित सो रहे हैं तो वह देश के सिपाही है जो आपको सुरक्षित रखने का जिम्मा उठकर अपना पूरा जीवन देश को समर्पित कर देते हैं।
कह सकते हैं भारत बदल रहा है विचार बदल रहे हैं परंतु गलत दिशा में बदलाव भी हानिप्रद होता है।
आशी प्रतिभा
मध्य प्रदेश, ग्वालियर











