
कोई तो हो जो याद करें,
मेरे लिए रब से फ़रियाद करें,
मुझे चाहने वाले हैं हजारों यहां,
इस भ्रम को तोड़ने का कोई प्रयास करें,
कोई रोके मुझे सूनी-सूनी राहों में,
मेरे नाम से आवाज़ करें ,
सूनी हैं यहां घर आंगन की दीवारें हैं,
मेरे साथ गुजारे पल दो पल,
मेरे सूने घर को आबाद करें।।
अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)











