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कविता

कोई तो हो जो याद करें,

मेरे लिए रब से फ़रियाद करें,

मुझे चाहने वाले हैं हजारों यहां,

इस भ्रम को तोड़ने का कोई प्रयास करें,

कोई रोके मुझे सूनी-सूनी राहों में,

मेरे नाम से आवाज़ करें ,

सूनी हैं यहां घर आंगन की दीवारें हैं,

मेरे साथ गुजारे पल दो पल,

मेरे सूने घर को आबाद करें।।

अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)

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