
मुंशी प्रेमचंद
1.मुंशी प्रेमचंद जिनका बचपन का नाम धनपतराय श्रीवास्तव था, उन रचनाकार की अद्भुत कहानी हम सुनाते हैं l
2.31 जुलाई 1880 को जन्मे, मां आनंदी देवी और पिता अजायब राय के पुत्र के विषय में बताते हैं ll
3.तीन सौ कहानियाँ जिनकी हमें उपहार में मिली l
4.”मानसरोवर” जैसी नदिया में हैं जो खिली ll
5.उपन्यास ‘ सेवा सदन’है स्त्री विमर्श का खज़ाना l
6.पांच लघु कहानियाँ बंद दरवाजा, बाबा जी का भोग, कश्मीरी सेव, देवी और राष्ट्र का सेवक इन्हें तुम भूल न जाना ll
7.दो विशेषताएं उनके लेखन की हमें हैं बताती l
8.यथार्थवाद, सामाजिक सुधार की भावना निहित है जो है लेखन की थाती ll
9.आम आदमी के जीवन को
गहराई से व्यक्त किया l
10 किसानों, मजदूरों, गरीब, शोषित वर्ग के संघर्षों को भी चित्रित किया ll
11.गबन, निर्मला, कर्मभूमि में रीति रिवाजों का खज़ाना भी परोस दिया l
- उपन्यास ” गोदान” एक
अनुपम कृति साहित्य जगत को उपहार दे दिया ll
13.कफन, ईदगाह, पूस की
रात है मील का पत्थर l
14.’बंद दरवाजा’ हैं बच्चों के
मनोविज्ञान का भाव प्रखर ll
15.दादी के प्रति प्यार का
प्रतीक वह चिमटा बन गया l
16.कहीं दूसरी नहीं मिसाल
जो इस कहानी में कौतूहल कर गया ll - एक शिलालेख है उनका
पूरा जीवन l
18.सारी कृतियाँ देती हैं समाज को नवजीवन ll - श्रद्धा और सम्मान
अर्पित करते हैं हम उस महान कृतिकार को l - हर रचना समाज को
दिखाती है आईना और उनमें छिपे मूर्तिकार को ll
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सरोज बाला सोनी
कवयित्री













