
माँ के जैसा कोई प्यार नही
माँ बिन तेरे ये संसार नही
चूल्हे पर बैठ बेटे के लिये खाना पकाती है
दिन हो या रात बस बेटे की भूख सताती है
चूल्हा माँ तेरा रोज ही जलता है
खाना खाना नही माँ तेरा प्यार बेटे के लिये पलता है
वो पल भी अदभुत होता माँ चूल्हे पर रोटी पकाती है
खुद ना खाये पर डांट डांट बेटे को दो रोटी ज्यादा खिलाती है
चूल्हे के सामने बैठ माँ के हाथ की बनी रोटी खाना भी एक़ दुर्लभ क्षण होता है
जीवन मे कभी ना भूलने वाला वो अनोखा पल बहुत विलक्षण होता है
माँ तेरा ही ये त्याग है कि बेटा बन जाता है
और दुर्योग देखों बेटा बनने के बाद ही माँ का प्यार भूल जाता है
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र













