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गजल


काफिया —- ओ की बंदिश
रदीफ—- अब तो।
बहर— 1222-1222-1222-1222=28

वतन की शान में मिलकर कदम बढ़ते चलो अब तो,
तिरंगे का सदा सम्मान ही ऊँचा करो अब तो।।

न झुकने दें कभी झंडा किसी भी आँधियों के तट ,
लहू से सींचकर इसको सदा रोशन रखो अब तो।

अमन का दीप हर घर में सदा जलता रहे यारो,
वतन की आन में जीवन समर्पित ही धरो अब तो।

नफ़रत भरी हर इक कगार पल भर में गिरा डालो,
फिर दिल वही नई दुनिया सभी मिलकर गढ़ो अब तो।

सुरभि’ कहतीशहीदों का न हो बलिदान व्यर्थ कभी,
प्रगति पथ पर सभी मिलकर निरंतर ही बढ़ो अब तो।


डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार

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