
साथिया तेरे बिन जी ना पायेंगे,
कसम से कहता हूँ, अब ना जियेगे
जब तुम ही नही,मेरे जिंदगी मे,तो
अब इस दुनियां मे,जी कर क्या करेंगे ?
तुम्ही से तो मेरी,ये दुनिया बसी है,
तुमसे ही तो,मुझे गम और खुशी है,
सुख दुख मे ,तुम ही मेरे साथ रही, है,
फिर अचानक मन मे,ये जुदाई कैसी है?
जो भी हो गिले शिकवे,सब मै स्वीकारा,
सुधरने का तो साथिया,मौका दो दोबारा,
शिकायत का,अब ना कोई मौका देंगे ,
साथिया,सात जन्मों का बंधन है हमारा ।
चुन्नू साहा पाकूड़ झारखण्ड













