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कविता

आजकल रिटायरमेंट ले रहे दोस्तों को बधाईयां देने का दौर चल रहा है

शुभकामनाएं देते हुए
दोस्तों का ग्रुप
मसखरी भी करता हैं !

दौस्तों के बताए मार्ग के अनुसार ठंडी आहें भरते है,
ग्रुप मजाक उड़ाया करता है।

हर पुरुष फिर से संशोधित जीवन में प्रवेश करता है ।

सेवा निवृत्त होकर फिर से संशोधित जीवन में प्रकाश भरता है।

बच्चों में अपनी खुशी ढुंढता है ,
बचपन ढुंढता फिरता है,

और बड़ों में अपनापन महसूस किया करता है।

मेरे रिटायरमेंट बंधुओं
समय का सदुपयोग जाने,

धर्म मार्ग जानें,
समय व्यतीत करते रहें,
रामायण जी पढ़ते रहें।

फालतु की रामायण में नहीं पड़े ।।

अशोक सुमन भवानी मंडी ( राज.)

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