
बनाना कोई ना बहाना,
रोज़ स्कूल में पढ़ने को आना।
ज्ञान का दीप है जलाना ,
सपनों को सच करके है जाना ।।
(अंतरा – 1)
नई सुबह की नई कहानी,
विद्यालय में सभी गुरु है ज्ञानी।
किताबों से दोस्ती सभी को है करना,
मेहनत से अपना भाग्यहै सँवरना।
हँसना, गाना, खेल- खेल में सीखना,
हर पल कुछ नया से करना।
जीवन को सुंदर तुमको है बनाना,
रोज़ स्कूल में पढ़ने को आना।।
बनाना कोई ना बहाना,
रोज़ स्कूल में पढ़ने को आना।
ज्ञान का दीप है जलाना ,
सपनों को सच करके है दिखाना ।।
गुरुओ का सम्मान हम रोज करेंगे,
सच्चाई व ईमानदारी से हम पढ़ाई करेंगे।
अनुशासन की राह पर हम चलेंगे,
विद्यालय का रुतबा है बढ़ाना।
बनाना ना कोई ना बहाना
रोज स्कूल में पढ़ने को हे आना
मात-पिता का मान है बढ़ाना,
अपने शहर झालावाड़ का नाम है चमकाना।
हर दिन नया कुछ प्राप्त करके घर है जाना,
रोज़ स्कूल में पढ़ने आना।।
कलम ही हमारी ताक़त होगी,
शिक्षा ही सबसे बड़ी दौलत होगी।
अज्ञान का तम हे मिटाना ,
हर बच्चे को विद्यालय में पढ़ने को है आना।।
बनाना कोई ना बहाना,
रोज़ स्कूल में पढ़ने को आना।
आओ मिलकर शपथ हम ये खाएँ,
हर दिन विद्यालय हम है आये।
हँसते-गाते कदम है बढ़ाना,
ज्ञान से अपना कल है सजाना।
बनाना कोई ना बहाना,
रोज़ स्कूल में पढ़ने को आना।।
धर्मेंद्र कुमार राठौर व्याख्याता भौतिक विज्ञान
पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय झालावाड़ राजस्थान












