
सब प्रयास आधे अधूरे हैं,जब तक पूरी तरह से कुछ करने की सोच नहीं हो,
सफल होने की तलाश छोड़ कर
साथ निभाने वाली लगन से काम करना हि भक्ति है,,
समर्पण और धैर्य हों
तो मनुष्य जीवन में प्रकाश इसी सोच में बसता है
किसी ने कहा है कि और सच हि कहा है
कि वीणा के तारों को इतना ढीला नहीं छोड़ौ कि सूर न आए,
और इतना भी नहीं कसा करो कि तार टूट जाए।
एक और सच बात से सामना हो कि कभी भी
इतना पास भी नहीं आओ कि दूर जा नहीं सकें ,
और
इतना दूर भी नहीं निकल जाना कभी कि पास आएं तो नज़रें मिला नहीं सकें।।
अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)












