
तेरी मेरी दोस्ती ,
यूं ही अमर रहे।
खुशियों भरी दोस्ती की,
अपनी डगर रहे।
मेरे दुःख और सुख में,
कोई साथी न हो,
तेरा हाथ मेरे,
हाथों में मगर रहे।
नामुमकिन भी मुमकिन,
हो ही जाएगा।
दुःख से भरा समंदर,
एक दिन खो ही जाएगा।
ऐ मेरे सखा…..
तू रहे साथ हरपल।
तब तो सच में…
मेरा हर दुख को ही जाएगा।
~ राघव सचिन
सांभर लेक, जयपुर, (राजस्थान)












