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शब्दों ने बाँधा मैत्री का सेतु, कल्पकथा की 260वीं काव्यगोष्ठी रही अविस्मरणीय

प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित राष्ट्र प्रथम हिन्दी भाषा सनातन संस्कृति एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार सोनीपत हरियाणा द्वारा राष्ट्रीय मित्रता दिवस के उपलक्ष्य में 260वीं साप्ताहिक ऑनलाइन काव्यगोष्ठी का गरिमामय आयोजन सौहार्द, आत्मीयता, मानवीय संवेदनाओं एवं साहित्यिक सृजनधर्मिता के अनुपम वातावरण में संपन्न हुआ। “तेरी मेरी मित्रता” विषय पर केंद्रित इस विशेष आयोजन में देश के विभिन्न अंचलों से जुड़े साहित्यकारों ने अपनी भावपूर्ण, कलात्मक एवं चिंतनपरक काव्य प्रस्तुतियों के माध्यम से मित्रता के शाश्वत आदर्शों, विश्वास, समर्पण, आत्मीयता तथा सामाजिक समरसता के विविध आयामों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया।

संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह की सूचना के अनुसार कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावशाली संचालन भास्कर सिंह माणिक ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मणिका वर्मा ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में सुजीत कुमार पाण्डेय की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशिष्ट आयाम प्रदान किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ गुरु वंदना, गणेश वंदना तथा सरस्वती वंदना के साथ हुआ। मंगलाचरण की पावन स्वर-लहरियों ने संपूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा एवं साहित्यिक गरिमा से अनुप्राणित कर दिया। इसके पश्चात नरेशचन्द्र उनियाल, सुजीत कुमार पाण्डेय, राघव सचिन, ईश्वर चंद्र विद्यावाचस्पति, मणिका वर्मा, अवधेश प्रसाद मिश्र ‘मधुप’, भास्कर सिंह माणिक, डॉ. श्याम बिहारी मिश्र, रामपति मौर्य, अमित पण्डा ‘अमिट रोशनाई’, संपति चौरे ‘स्वाति’, राधा श्री शर्मा तथा पवनेश मिश्र ने अपनी उत्कृष्ट काव्य प्रस्तुतियों से मित्रता के विविध भावों को सजीव रूप प्रदान किया।

समापन सत्र में राष्ट्रगीत “वन्दे मातरम्” के 150वें स्मरणोत्सव वर्ष के उपलक्ष्य में सामूहिक राष्ट्रगीत-गायन किया गया। इसके उपरांत राधा श्री शर्मा ने आमंत्रित अतिथियों, सहभागी साहित्यकारों एवं समस्त दर्शकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। अंत में “सर्वे भवन्तु सुखिनः” के मंगलमय शांति-पाठ के साथ कार्यक्रम को विश्राम प्रदान किया गया।

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