
प्रभाती वंदन के साथ पावन सावन माह के प्रथम सोमवार की हार्दिक बधाई एवं चंद दोहा मुक्तक
शीश सोहती गंग है,गले सर्प की माल।
सब की रक्षा नित करें, काटें हर जंजाल।
शिव ने विष को कंठ में, स्वयं किया था ग्राह्य,
जिसे देखते ही हुए, देव सभी खुशहाल।।
शंभु नाम अति श्रेष्ठ है, एक निष्ठता छाप।
सोमवार सावन प्रथम, करो सभी जन जाप।
हर-हर बम-बम नाद से, भक्त करेंजयकार,
भवसागर से पार कर,हरें नाथ संताप।।
दीन-दुखी सब की सुने, बाबा करुण पुकार।
शिव आराधन से मिटे, मन के सारे खार।
उद्धारक जग के बने, आशुतोष भगवान,
भक्ति भाव से जो करे,उस पर कृपा अपार।।
चलो करें अभिषेक है, गंगा जल ले साथ।
महिमा भोले की अमित भक्त झुकाते माथ।
सावन पावन मास में, सजा शंभु दरबार,
जो भी आता है शरण, शीश धरे प्रभु हाथ।।
डॉ गीता पांडेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश













