
किशोर कुमार जिस कॉलेज में पढें हैं मैंने भी उसी कॉलेज में 1960-1966 तक बाद में 1968-76 से तक कई वर्षों तक पढ़ाई की है क्योंकि मैंने BA और तीन विषय में MA किया। कई वर्षों तक क्रिश्चियन कॉलेज से जुड़ा हुआ हूं और आज भी कई समारोह मैं मेरा आना-जाना रहता है ।
मैंने क्रिश्चियन कॉलेज के ब्रांनसन हाल से किशोर दा के कुछ गाने गाए थे भले ही किशोर दा आज दुनिया में नहीं लेकिन उनके किस्से क्रिश्चियन कॉलेज के हॉस्टल से लेकर काका के कैंटीन तक और काका के कैंटीन से लाइब्रेरी और क्लासरूम, साइकिल स्टैंड तक आज भी सुनाए जाते हैं भले ही अब यहां साइकिलें नहीं आती हैं आती है पर उस जमाने में इसे साइकिल स्टैंड ही कहा जाता था ।
यहां अभी भी वह पेड़ है जिसके नीचे बैठकर किशोर दा ने पहला Innovation ऑडल्यु ऑडल्यु किया था ।
उसके बाद में वे फिल्मी दुनियां में चले गए थे मेरे प्रोफेसर जो इतिहास विभाग के तथा अहिल्या विश्वविद्यालय के डीन थे स्वर्गीय सोलोमन सर अक्सर क्लास में किशोर कुमार के किस्से सुनाए करते थे।
मेरे एक और मित्र स्वर्गीय स्वरूप बाजपेई जो कालेज के इतिहास विभाग में प्रोफेसर थे तथा नई दुनिया के प्रमुख पत्रकारों में से एक थे उन्होंने भी किशोर कुमार पर
कई लेख प्रकाशित किये हैं उन्हीं दिनों हो मेरे स्वर्गीय मित्र किशोरी मेहरा जिनकी इटारसी में जहां आज भगत जी का चाय का स्टाल है वहीं पर उनकी लस्सी की दुकान थी मैं जब भी मैं इटारसी आता था मेरी बहुत आवाभगत करते थे ।
सलीम साहब सलमान खान के पिताजी जब कभी हमारे कॉलेज में आते थे वह भी किशोर कुमार का कोई ना कोई गीत गाते थे उनके गीत गुनगुनाते थे।
राम वल्लभ गुप्त “इंदौरी”











