
भारतीय संस्कृति में 16 संस्कारों में वैदिक विवाह 16 संस्कार भारतीय संस्कार में जन्म से लेकर मरण तक चलते हैं उन्हें में से एक संस्कार है विवाह संस्कार मुझे बेहद ही सुंदर अति आवश्यक है जिसके बिना मानव जीवन कुछ रिक्त ऐसा लगता है दोस्तों विवाह प्रणाली एक सामाजिक व्यवस्था है जिसमें दो परिवारों की आपसी सहमति से जाती प्रतिष्ठा समाज पृष्ठभूमि और संस्कारों को जांच पर रख कर दो परिवारों में संबंध किया जाता है जो बहुत वर्षों से सुचारू रूप से चला आ रहा है कई कोई अपेक्षा कोई उम्मीदें आशा आत्म सम्मान को एकता सीमित व्यवस्था के मदद नजर रखकर विवाह संपन्न होते आ रहे हैं इस दौर में पुरुष वर्ग बाहरी दुनिया का नेतृत्व करते थे रोज रोटी का जुगाड़ करना मकान शिक्षा परिवार पालन पोषण करना यह पुरुष वर्ग की जिम्मेदारी थी जिसे वह बखूबी अपने प्रतिष्ठा को कायम रखने के साथ निभा रहे थे सो जाहिर सी बात है कि समाज पुत्र सत्तक को लिए हुए सदियों से चला रहा है और आज भी कहीं-कहीं अभी भी अभिमान है और महिलाओं की दुनिया भी घर गृहस्थी की चारदीवारी में रहकर घर व्यक्ति की सारी जिम्मेदारियां को बखूबी निभाने बच्चों का पालन पोषण करना घर की दहलीज को कभी पार न करना यह सदैव पुरानी बातें पर कहीं-कहीं आज भी विद्यमान है खैर यह बात तो वर्षा विकास पहले ही डाल चुके अब हाल ही परिस्थितियों बहुत बदल रही है जिसके अंतर्गत सो जाते विवाह की दर घट रही है क्योंकि आज की पीढ़ी बड़ी ही चुनाव करने वाली नियम कानून पर नहीं चलने वाली है जो भी मुझे सही लगता है जीवन के इतने बड़े फैसले बड़े सोच समझकर में लेते हैं इसलिए वह प्रेम विवाह ने लव मैरिज को ज्यादा प्राथमिकता देने वालों पर आज भी हमारा समाज पुराने घरों पर चल रहा है वह इसे आज भी गलत मान रहा है क्योंकि इसमें उन लोगों की सहमति नहीं होती है क्योंकि प्रेम विवाह करने से पूरे दो लोग अच्छे तरीके से एक दूसरे को जान जानते समझते हैं एक दूसरे की आदतों को उनके उच्च शिक्षा परिपक्वता को बखूबी शामिल करते हैं वह दोनों ही अपने करियर वाइस एक दूसरे की फील्ड के होने से अधिकांश सामूहिक समझदारी उन्हें आपसे पाए जाते हैं जिसकी वजह से वह अरेंज मैरिज की बजाय लव मैरिज करना ज्यादा सही समझते हैं जिसमें विवाह में अधिकतर तौर पर दूरियां मनमुटाव और अकेलापन अकोलापन बे मतलब की जोड़ी बेमेल की जोड़ी और अरेंज विवाह किए जाने के कारण कई युवा विवाह जोड़े इस डांस को कहते हैं क्योंकि इस वजह से विवाह रिश्तेदारों या रिश्तेदारों के डर के रिश्तेदार द्वारा ले गए रिश्तो से होते हैं इस वजह से एक दूसरे को एक दूसरे को समझ नहीं पाते एक दूसरे के प्रश्न भूमि को जान नहीं पाते हैं ढेर सारी कमियां और खूबियों के उनमें पता नहीं चल पाता है वक्त के साथ यह जब चीज सामने आती है तो हालत परिस्थितियों बदलता है इस वजह से अरेंज विवाह आजकल बहुत टूट रहे हैं अब वक्त बदल रहा है सोच बदली है किंतु कुछ समाजों के जाति के लोग अभी भी वही के वहीं खड़े हैं लकीर के फकीर बने बैठे हैं आज के संदर्भ में विवाह करने की चुनौती पूर्ण व्यवस्था होती जा रही है जो की चिंता जाने की स्थिति है वह विचारणीय है जब तक हमारा समाज अपनी सोच नहीं बदलेगा अपनी आंखें नहीं खुलेगा तब तक हम ऐसे ही हैरान परेशान होते रहेंगे कहीं लड़कियां देश के गांड मारी जाएगी तो कहीं लड़के खाइयो से गिरकर उन्हें मौत के घाट उतारा जाएगा अब समय आ गया है कि हम हमारी सोच और अपनी सोच को बदले सड़े गले नियम कानून को तोड़े और समय के साथ हम कम से कदम मिलाकर सुबह जाते भी वहां जब तक सही व्यवस्था में चले तब तक उसको बढ़ाया हुआ नहीं तो हम लव मैरिज को प्राथमिकता दे और उपरोक्त जितने भी घटनाएं हो रही उन्हें रोका जा सके एक स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए यह सोच रखना बेहद जरूरी है स्वरचित लेखिका रचना बढ़िया मध्यप्रदेश













