
तेरे प्रेम के पंख जब, मन-आँगन पर आए,
सूने जीवन के सभी, कोने फूल खिलाए।
तेरी चितवन की किरण, भोर नई बन जाए,
मेरे मन का हर कमल, हँसकर स्वयं खिल जाए।
तेरी मधुर मुस्कान से, ऋतु बसंत उतरती,
साँस-साँस में प्रेम की, सुगंध नई बिखरती।
हाथों में जब हाथ हो, थम जाए हर पल,
धड़कन गाए प्रेम का, मधुर-मधुर मंगल।
तेरे संग चलते हुए, पथ भी गुनगुनाता,
पायल की हर रुनझुन में, मेरा मन मुस्काता।
पंख लगे अरमान को, छू लें नील गगन,
तेरे मेरे प्रेम का, बन जाए मधुवन।
चाँद सजे आकाश में, तारे दीप जलाएँ,
तेरी मेरी प्रीत पर, मिलकर गीत सुनाएँ।
नयनों की चुप बात को, अधरों ने पहचाना,
एक-दूजे में ही हमने, अपना जग पहचाना।
सात सुरों की रागिनी, तेरे नाम से गाए,
हर जन्मों की प्रीत यह, अमर कथा बन जाए।
प्रेम-पंख फैलाकर हम, उड़ें अनंत विहान,
तू मेरी मुस्कान रहे, मैं तेरा सम्मान।।
रचनाकार
कौशल
मुड़पार चु, पोस्ट रसौटा, तहसील पामगढ़,जिला जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़













