Uncategorized
Trending

मनुष्य के गुण चीनी से होने चाहिए

किसी एक पत्थर को ख़ूब तराश कर
देवता की मूर्ति का रूप दिया जाता है,
दूसरे बदनसीब पत्थर पर नारियल
फोड़ कर मूर्ति को चढ़ाया जाता है।

पहले वाले पत्थर ने मूर्तिकार की
हथौड़ी से कुछ चोटें खायी होती हैं,
दूसरे पत्थर को रोज़ रोज़ नारियल
सर पर फोड़वाकर चोटें खानी होती हैं।

मनुष्य के गुण चीनी या नमक जैसे
होना चाहिये, जो भोजन में रहते हैं,
पर दिखाई नहीं देते और ना हों तो
उनकी बड़ी कमी महसूस करा देते हैं।

क्रोध हवा का वह झोंका होता है,
जो ज्ञान का प्रकाश बुझा देता है,
जो सच बोलता है, संसार सबसे
अधिक नफरत उससे करने लगता है।

रोग व बीमारियाँ अपने शरीर में
पैदा होकर भी हानि पहुँचाते हैं,
पर जड़ी बूटियाँ वन में पैदा होती हैं,
फिर भी हमें लाभ ही पहुँछाती हैं।

हित चाहने वाला यदि पराया भी है,
तो वह अपना जैसा लगने लगता है,
स्वार्थवश यदि कोई अपना अहित
करे, वो पराया सा लगने लगता है।

भरोसा नहीं है क्या मेरे ऊपर बस
यह कह कर लोग धोखा दे जाते हैं,
अपने पराये आज की इस दुनिया में,
आदित्य मुश्किल से पहचाने जाते हैं।

डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *