
छंद: सरसी छंद
बरसाने की गली-गली में, राधा रानी छाई।
मुरलीधर की धुन सुनते ही, मन में प्रीत समाई।।
यमुना तट पर छवि मनोहर, श्याम खड़े मुस्काते।
राधा की चितवन में खोकर, प्रेम सुधा बरसाते।।
कुंज-कुंज में रास रचाते, मधुर मधुर मुस्कान।
गोप-गोपियाँ भाव विभोर, गाते हरि गुण गान।।
मोर मुकुट सिर शोभित सुंदर, पीताम्बर लहराए।
राधा संग श्याम सलोने, प्रेम रस बरसाए।।
चरण कमल की धूलि पाकर, जीवन हो उजियारा।
राधा-कृष्ण कृपा से ही, कटे भवसागर सारा।।
नाम जपे जो प्रेम लगाकर, पाए सुख अपार।
राधा-कृष्ण कृपा दृष्टि से, जीवन हो साकार।।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार











