काव्य रस की सरिता संग मानवता का संदेश: ‘सुख़न का आशिया’ की गोष्ठी में कवियों ने राष्ट्रकवि को दी स्वरांजलि

”कांकेर (छत्तीसगढ़) की 7 वर्षीय आदिवासी बालिका ‘चांदनी’ (ग्राम-चरभट्टी) की शिक्षा के लिए भेंट किए दस हज़ार पाँच सौ रुपये”
बाड़मेर, छत्तीसगढ़। 05 अगस्त, 2026: साहित्य हमेशा से समाज को संवेदनशील तथा जागरूक बनाने का कार्य करता आया है। साहित्य-शिल्पियों का सहृदय ही समाज की वेदना, कष्ट एवं विभिन्न परिस्थितियों की मानवीय संवेदनाओं को गहराई से महसूस कर सकता है। इसका जीवंत उदाहरण हाल ही में देखने को मिला जब ‘सुख़न का आशिया’ संस्था के तत्वावधान में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती पर एक राष्ट्रीय ऑनलाइन साहित्यिक गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया।
इस गोष्ठी में न केवल साहित्य का रंग बिखरा, बल्कि सामाजिक सरोकार निभाते हुए छत्तीसगढ़ के कांकेर जिला अंतर्गत ग्राम चरभट्टी की 7 वर्षीय आदिवासी बालिका चांदनी की शिक्षा के लिए ₹10,500 की सहयोग राशि एकत्रित कर 3 अगस्त को उसके परिवार को भेंट की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कांकेर (छत्तीसगढ़) की संवेदनशील व पारखी चिंतनयुक्त तथा शिक्षा, समाज एवं साहित्य सेवा में सतत रत कवयित्री ममता साहू ने की और मुख्य अतिथि बिहार के नरेंद्र सिंह रहे। कार्यक्रम का संचालन बाड़मेर के केविन चौहान ने किया। गोष्ठी की शुरुआत नरेंद्र सिंह की सरस्वती वंदना और साधना शाही व सुनील कुमार खुराना के स्वागत गीतों से हुई। इस दौरान कवयित्री साधना शाही का जन्मदिन भी मनाया गया।
काव्य पाठ के सत्र में कृष्ण कुमार चंद्रा के गीतों, केविन चौहान व डॉ. संजीदा खानम शाहीन की ग़ज़लों व मेघा अग्रवाल के मुक्तकों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके साथ ही कृष्णा जोशी, सुरभि शुक्ला, गरिमा लखनवी, सावित्री नेताम, काजल वर्मा और रमेश चंद्रा ने अपनी बेहतरीन रचनाओं की प्रस्तुति दी। अध्यक्ष ममता साहू की गहन तथा संतुलित समीक्षा को सभी ने विशेष रूप से सराहा। देशभर से जुड़े साहित्यकारों, भामाशाहों एवं प्रबुद्धजनों की गरिमामयी उपस्थिति के बीच, अंत में डॉ. संजीदा खानम और सुरभि शुक्ला के धन्यवाद ज्ञापन के उपरांत इस सफल व प्रेरणादायी गोष्ठी का समापन हुआ।













