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कविता

कविता

बेवजह उलझीं उलझीं सी रहे तो उम्र,

हंसने हंसाने में कट जाऐं तो जिंदगी,

उदास हो कर काटते रहो तो उम्र,

मुस्कुराहट से जिते हैं तो जिंदगी ,

थम सी जाएं और पीड़ा बनी रहे तो उम्र ,

खुशियों में बीतती रहें तो जिंदगी,

अपनी मुट्ठी से रेत सी फिसल जाएं तो उम्र,

अपनी हथेली पर सजी हुई रहे तो जिंदगी,

आंखों का पानी बन कर बहती जाए तो उम्र,

आंखों का मिठा सपना बनकर बस जाएं तो जिंदगी,

आंखों को चुभती रहे हर पल तो उम्र ,

आंखों में काजल सी सजी हुई रहे तो जिंदगी ,

पल पल काटे नहीं कटते हैं तों उम्र,

खुश्बू सी महक कर
महकाती जाऐं तो जिंदगी,

रातों को नींद नहीं आती है तो उम्र,

सुकून से देर तक नहीं जागें हम तो जिंदगी।

मातम में बीते तो उम्र,

जश्न में खिलखिलाती हुई रहे तो जिंदगी ।।

अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)

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