
“जन गण मन” सिर्फ गान नहीं,
यह देश की अमर रवानी है।
भारत माता के यश गौरव की,
अनुपम ही एक कहानी है।
दिनकर रश्मि लालिमा लेके,
नित नई ऊर्जा भर जाता है।
भारत माँ के श्वेत भाल पर,
स्वर्ण रश्मि मुकुट बन जाता है।
हर-हर बहे निशदिन नदियां,
रक्त धमनियों सी बहती है।
हरा भरा धरती को करके,
खुशहाली सब में भरती है।।
राष्ट्रगान जन गण लिख कर,
भारत माँ की पहचान बने।
गुरु रवींद्र नाथ भारत माँ के,
बहु बुद्धिजीवी इंसान बने।।
भगवान दास शर्मा “प्रशांत”
इटावा उत्तर प्रदेश











