
हराकर दर्द के लम्हे, हँसी पल जीत लाती हैं बेटियां,
कभी उलझे हुए प्रश्नों के हल भी कर लाती हैं बेटियां।
अब किसी से कम नहीं हैं हमारे देश की बेटियाँ,
निकलकर चारदीवारी से, मेडल जीत लाती हैं बेटियां।
कभी जिनके कदमों पर समाज ने पहरे बिठाए थे,
कभी सपनों के आगे कितने ही पर्दे गिराए थे,
मगर इनकी उड़ानों को कहाँ कोई रोक पाया है,
आँधियो में भी अपने हौसलों का दीप जलाया है।
हराकर दर्द के लम्हे, हँसी पल जीत लाती हैं बेटियां,
कभी उलझे हुए प्रश्नों के हल भी कर लाती हैं बेटियां।
नहीं माँगतीं ये दया, न किसी की मेहरबानी,
इनकी मेहनत ही लिखती है इनकी नई कहानी।
पसीने की हर बूँद को मोती बना देती हैं,
मुश्किलों के सामने मुस्कुराकर राह बनाती हैं बेटियां।
कभी खेल के मैदानों में तिरंगा लहराती हैं बेटियां,
तो कभी विज्ञान की दुनिया में नए दीप जलाती हैं बेटियां,
कभी शिक्षा, कभी सेवा, कभी अंतरिक्ष की राह पर,
हर क्षेत्र में अपने सामर्थ्य की पहचान बनाती हैं बेटियां।
जहाँ लोग कहते थे—“ये काम तुम्हारे बस का नहीं,”
वहीं बेटियाँ कहती हैं—“कोई सपना असंभव नहीं।”
अपने परिश्रम से इतिहास के पन्ने बदल देती हैं बेटियां,
हार को भी जीत की पहली सीढ़ी बना लेती हैं बेटियां।
जीतकर मेडल, देश का मान सम्मान बढ़ाती है बेटियां,
करोड़ों दिलों के अभिमान पर विजय का झंडा रोपती है बेटियां।
माँ की आँखों की चमक, पिता का गर्व बनकर,
अपने वतन की मिट्टी का मान बढ़ाती हैं बेटियां।
अब किसी से कम नहीं हैं हमारे देश की बेटियाँ,
निकलकर चारदीवारी से, मेडल जीत लाती हैं।
हराकर दर्द के लम्हे, हँसी के पल जीत लाती हैं बेटियां,
कभी उलझे हुए प्रश्नों के हल भी कर लाती हैं बेटियां।
उड़ान इनकी देखकर आसमान भी मुस्कुराता है,
इनके हौसलों के आगे पर्वत भी झुक सा जाता है।
जब ठान ले तो इतिहास नया लिख जाती है बेटियां,
अपने कर्म से भारत का माथा ऊँचा कर जाती है बेटियां।
सलाम उन सपनों को जिन्हें सच करके दिखाती है बेटियां ,
अपने जुनून से भारत की पहचान को और प्रखर बनाती हैं बेटियां।
जहाँ कदम रखती हैं, विजय की गूँज सुनावा जाती है बेटियां—
सिर्फ़ मेडल ही नहीं,
भारत का विश्व में परचम लहरा जाती हैं बेटियां। 🇮🇳🌸 स्वरचित
धर्मेंद्र कुमार राठौर
व्याख्याता भौतिक विज्ञान
झालावाड़ राजस्थान













