
काले-काले बादल आए, लेकर शीतल पवन,
धरती की प्यास बुझाने, बरसा रिमझिम सावन।
मिट्टी से उठी खुशबू, मन को बहुत सुहाती है,
पेड़ों पर झूले पड़े हैं, कोयल कुहू-कुहू गाती है।
नदियाँ उफन कर बहतीं, खेतों में पानी भर जाए,
किसान के चेहरे खिलते, फसल लहरा-लहरा जाए।
मेंढक टर-टर करते हैं, चिड़िया चहक उठती है,
हर तरफ हरियाली ही, आंखों को भाती है।
सखियाँ झूला झूलतीं, गीत मल्हार के गातीं,
हाथों में हरी चूड़ियाँ, मेहंदी रचती जातीं।
चाय संग गर्म पकोड़े, मौसम और सुहाना है,
सावन का ये नजारा, सबसे प्यारा माना है।
सावन आया शिव का महीना, भक्ति की धारा बहती है,
बेलपत्र, जल और दूध से, भोले की पूजा होती है।
कांवड़ियों की भीड़ चली, “बम-बम भोले” गाते हैं,
डमरू की गूंज सुनकर, सारे कष्ट मिट जाते हैं।
बिजली चमके, गरज हो, बूंदें गिरें रिमझिम,
प्रेमी-प्रेमिका मिल बैठें, बातें करें दिल ही दिल।
ये महीना त्याग और प्रेम, दोनों का प्रतीक है,
सावन बरखा का राजा, जीवन का संगीत है।
आओ मिलकर झूमें हम, गाएं सावन के गीत,
रिश्तों में मिठास घोले, ये बरखा की रीत।
हरा-भरा संसार देखो, मन भी हरा-भरा है,
सावन बिना जीवन, जैसे फूल बिना सहरा है।
अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला ‘अमन’ सनातनी
सावनेर नागपुर ( महाराष्ट्र)













