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प्रभाती वंदन के साथ चंद मुक्तक

नैतिकता की परिभाषाएंँ, जग में सबकी अपनी-अपनी।
कर्मों का फल सबको मिलता,जैसी जिसकी होती करनी।
निश्छल भावों से जो रहता,भोले उस पर कृपा करें हैं,
सच्चे मन जो शिव को पूजे, खुशियांँ उसकी झोली भरनी।।

स्वीकार करो हे दुनिया वालों, मेरी पावन पुण्य प्रभाती।
सकल चराचर का वंदन कर, जिसे आप तक मैं पहुंँचाती।
गगन धरा रवि शशि उडुगन, मात-पिता गुरु की आभारी,
जिनके क्रियाकलापों से ही, अनुपम भोर सदा है आती।।

बदलते लोग बदले रिश्ते, और बदलता जब मौसम है।
कभी खुशी दे जाता है तो, देता कभी हजारों गम है।
इनसे बचकर सदैव रहिए, कभी भरोसा मत तुम करना,
किस तरफ करवटें कब लें लें, कभी न समझो इनको कम है।।

सूर्य देव से सीख सदा लो, कर्म पंथ पर तुम बढ़े चलो।
लक्ष्य साध कर मंजिल पाओ,नवल नित्य सपने गढ़े चलो।
सद उपयोग समय का कर लो,लौट नहीं फिर यह आता है,
धर्म-कर्म के बनो हितैषी,वेद शास्त्र सब हैं पढ़े चलो।।

डॉ गीता पांडेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश

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