Uncategorized
Trending

आदिवासी—माटी की आवाज़

माटी की ख़ुशबू में जिनका,
सदियों से संसार बसा,
जंगल जिनका अपना आँगन,
नदियों में जिनका प्यार बसा।

धरती माँ की गोद सँभाली,
प्रकृति का सम्मान किया,
अपनी बोली, अपनी संस्कृति से,
भारत का गौरव गान किया।

सरल हृदय, मगर हौसला ऐसा,
आँधियों से भी टकराते हैं,
अपने हक़ और अपनी अस्मिता की,
हर मुश्किल में आवाज़ उठाते हैं।

इनके लोकगीतों की धुन में,
सभ्यता का इतिहास मिले,
इनकी परंपराओं के आँचल में,
संस्कृति का विश्वास मिले।

न कोई भेद, न कोई दूरी,
सबको साथ बढ़ाना है,
जल, जंगल और ज़मीन के संग,
इनका अधिकार बचाना है।

आदिवासी केवल एक समुदाय नहीं,
भारत की रूह की पहचान हैं,
इनकी संस्कृति, इनका संघर्ष,
हम सबकी अमूल्य धरोहर महान है।

आओ आज संकल्प करें—
सम्मान, समानता और अधिकार दें,
आदिवासी अस्मिता की इस लौ को
मिलकर सदैव रोशन रखें।

विश्व आदिवासी दिवस पर
सभी आदिवासी भाई-बहनों को
सादर नमन एवं हार्दिक शुभकामनाएँ।

— कवयित्री/लेखिका
श्री ठाकुर, देवघर, (झारखंड)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *