कल्पकथा सम्मान समारोह अगस्त २०२६ में विजय रघुनाथराव डांगे को कल्प शिल्प विभूषण एवं शोभा प्रसाद को कल्प सृजन कौशल सम्राट सम्मान

जहाँ साधना का सम्मान होता है, वहीं सृजन की नई पीढ़ी को दिशा मिलती है कल्पकथा इसी संकल्प का साहित्यिक उत्सव है। – रघुवंशमणि सिंह
प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार की संवाद प्रभारी ज्योति सिंह ने बताया कि अगस्त २०२६ मासिक सम्मान समारोह में कल्पकथा परिवार ने विविध विधाओं में विद्वान रचनाकारों को सम्मानित किया।
डॉ. गजेंद्र हरिहारनों दीप की अध्यक्षता और वरिष्ठ पत्रकार, समाजसेवी प्रधान संपादक एवं संचालक राष्ट्रीय दैनिक न्यूज धमाका श्री रघुवंशमणि सिंह जी जमशेदपुर झारखंड के मुख्य आतिथ्य में कार्यक्रम का कल्पकथा साहित्य संस्था के यूट्यूब चैनल पर सीधा प्रसारण किया गया जिसमें देश भर के साहित्य प्रेमीजनों की गरिमामय उपस्थिति रही।
पवनेश मिश्र के संचालन के आयोजन में मीरा परिहार मंजरी को कल्प सृजन भूषण, रमापति मौर्य को कल्प कवि कुल कलश, सूरीनाम दक्षिण अमेरिका की सांद्रा लुटावन गणेश को कल्प वैचारिक शिखर, विजय रघुनाथराव डांगे को कल्प शब्द साधक सम्मान से सम्मानित किया गया। वही मंच संचालन एवं संयोजन हेतु भास्कर सिंह माणिक को काव्यगोष्ठी, कीर्ति त्यागी, डॉ मंजू शकुन खरे, को कल्प भेंटवार्ता, अतुल कुमार खरे को कल्प कथा मंजूषा विशेष कल्प संवाद कौशल अलंकरण से अलंकृत किया गया जबकि रमापति मौर्य को कल्प शिल्प विभूषण सम्मान प्रदान किया गया।
कल्पकथा परिवार द्वारा विशेष रूप से सृजन और नवाचार को प्रोत्साहन देने के लिए संचालित शब्द आधारित सृजन कार्यक्रम दैनिक कल्प सर्जना में पटल प्रभारी विशेष कल्प सर्जना ध्वजवाहक सम्मान से डॉ जया शर्मा प्रियंवदा, ज्योति प्यासी, प्रेमलता कुमारी पुष्पेश, गरिमा वार्ष्णेय, सूर्यपाल नामदेव चँचल, जितेंद्र शास्त्री, कीर्ति त्यागी, मंजू शकुन खरे का अभिनंदन किया गया जबकि शोभा प्रसाद को कल्प सृजन कौशल सम्राट, मणिका वर्मा को कल्प सृजन कौशल मुकुट, एवं डॉ. कर्नल आदि शंकर मिश्र आदित्य को कल्प सृजन कौशल प्रासाद प्रशस्ति पत्र से सत्कारित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय दैनिक न्यूज धमाका के संस्थापक एवं संचालक श्री रघुवंशमणि सिंह ने कहा कि जहाँ साधना का सम्मान होता है, वहीं सृजन की नई पीढ़ी को दिशा मिलती है कल्पकथा इसी संकल्प का साहित्यिक उत्सव है। अंत में देश प्रेम की भाव धारा को समर्पित राष्ट्रगीत वन्दे मातरम के १५०वैं स्मरणोत्सव वर्ष में अमर बलिदानियों के सम्मान में वन्देमातरम गायन के पश्चात सभी का आभार व्यक्त किया गया।











