
भावनाएं सुन्न होने लगी है,,,,
अंतिम संस्कार की विधि भी
अब वीडियो कॉल पर होने लगी है ,,,,
देखो ये कलयुगी औलादे अब
किस दिशा की ओर बहने लगी हैं…..
नहीं परवाह! की कोई चला गया
अब न लोट कर आयेगा ,
जिसने दिया ,ये जीवन कभी
स्तर गिर गया है ,आज सोच का
जब एक बिटिया भी,अंतिम संस्कार को
दुख नहीं , जिम्मेदारी मान ढोने लगी ।।
दुख लगता है जानकर
ये अपनों की अपनो के लिए बाते
श्वास अंतिम लेते समय भी
नहीं होती अब,अपनों से मुलाकाते
तो अब थोड़े स्वार्थी तुम भी होजाओ
वृद्धाश्रम में थोड़ा समय बिताओ,
जब अपने ही साथ नहीं है तो ,
कुछ तो दोस्त बना लो
अंतिम समय के लिए अपने हिस्से की जमीन जुटा लो।
आशी प्रतिभा
मध्य प्रदेश, भारत











