
मैं कलयुग का संतान हूं
जिस मां-बाप ने जन्म दिया
परवरिश कर बड़ा किया
खूब लाड़ प्यार दिया
जिंदगी जीने का सहारा दिया
आज उन्हें ही सहारा देने से
कतराने लगे हैं हम
मैं कलयुग का संतान हूं
जिस मां-बाप ने बीमार होने
रात- भर जग कर देखभाल किया
गोद में सुला लोरियां सुनाई
आज उनके ही अरमानों को
मिटा देते हैं हम
मैं कलयुग का संतान हूं
जिनकी बदौलत दुनियां में नाम कमाया
जिनकी वजह से तमाम खुशियां
मुझे मिली
जिनके सहारे कामयाबी को चूमता रहा
उन्हें ही आज घर से बेदखल कर देते हैं
मैं कलयुग का संतान हूं
डॉ मीना कुमारी परिहार













