
आजादी का पर्व है, आया अगस्त माह।
लाल किले से गूंजता, वंदे मातरम् वाह॥
बच्चा बूढ़ा हाथ में, तिरंगा थामे साथ।
गर्व से लहराए तिरंगा, सबके सर पर हाथ॥
देशभक्ति का संकल्प
आरजू मेरी एक ही, देश रहे आजाद।
इस माटी का कर्ज चुका, करूं राष्ट्र आबाद॥
खेत किसान सींचता, सीमा पे जवान खड़ा।
इनकी मेहनत से, हिंदुस्तान हो बड़ा॥
बलिदानियों को नमन
खादी चरखा गांधी का, नारा भगत महान।
आजाद हिंद सेना चली, झांसी बनी मिसाल॥
फांसी वीरों ने चूमी, घर लुटाया लाख।
खून से लिखी गाथा ये, बलिदानों की राख॥
शपथ और एकता
नमन शहीदों को मेरा, शीश झुकाऊं आज।
“सर कट जाए पर तिरंगा, झुके नहीं” की आवाज॥
जात पात दीवारें गिरा, एकता का गीत।
गली गली दीप जले, भारत की है रीत॥
आजादी का अर्थ
छुट्टी नहीं आजादी, जिम्मेदारी भार।
भूख मिटे भ्रष्टाचार मिटे, हो खुशियों का द्वार॥
“देश पहले” की शपथ,
लें सब लोग आज।
आदित्य सपना पूरा हो सार्थक काज॥
जयघोष
जय हिंद, जय भारत का, गूंजे नारा आज।
वंदे मातरम् आदित्य, करे देश पर नाज॥
जय हिंद, जय भारत, वंदे मातरम्
डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ













